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एक संगिनी
एक संगिनी तुम्हारा मिलना जीवन को एक नई आस देता है, घोर अंधेरे में विहंगम उजला कोई प्रकाश देता है। तुम तब आई जब युद्ध मैं हार चुका था, निराश...
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एक संगिनी तुम्हारा मिलना जीवन को एक नई आस देता है, घोर अंधेरे में विहंगम उजला कोई प्रकाश देता है। तुम तब आई जब युद्ध मैं हार चुका था, निराश...
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मिट्टी को जब-जब चाक धरा... मिट्टी को जब-जब चाक धरा, रच बर्तन में आकार गढ़ा, बर्तन मिट्टी से बचा धरा, क्यों मैं कुम...
Mast 🔥🔥
ReplyDeleteNice line👌🏻
ReplyDeleteThank you so much
ReplyDeleteदिल को छू गई ये चंद पंक्तिया, धन्यवाद ऐसी भावनात्मक रचना के लिए।बहुत बहुत शुक्रिया।
ReplyDelete👍🏻bhai word tere dil ko chu leti h..keep it up🙏🏻🤘🏻
ReplyDeleteKeep it up dost🙏👍👍
ReplyDeleteशुक्रिया दोस्तो🙏
ReplyDeleteसाभार☺️
Amazing😍😍
ReplyDeleteNice line.osmmm
ReplyDeleteNice line. Osmmm
ReplyDeleteThnx
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