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Monday, 23 November 2020
प्रेम
"प्रेम के बदले में प्रेम पाने की ईच्छा करना ही मनुष्य के दुख का सबसे बड़ा कारण है। प्रेम तो केवल देने का नाम है, प्रेम में अगर वापस पाने की ईच्छा की जाए तो वह प्रेम न रहकर सौदा बन जाए। लेकिन दुख तो तब होता है जब आपने अपना सारा प्रेम निश्छल भावना से किसी पर लुटा दिया हो और उसे इस बात की कद्र भी न हो।"
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एक संगिनी
एक संगिनी तुम्हारा मिलना जीवन को एक नई आस देता है, घोर अंधेरे में विहंगम उजला कोई प्रकाश देता है। तुम तब आई जब युद्ध मैं हार चुका था, निराश...
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एक संगिनी तुम्हारा मिलना जीवन को एक नई आस देता है, घोर अंधेरे में विहंगम उजला कोई प्रकाश देता है। तुम तब आई जब युद्ध मैं हार चुका था, निराश...
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मिट्टी को जब-जब चाक धरा... मिट्टी को जब-जब चाक धरा, रच बर्तन में आकार गढ़ा, बर्तन मिट्टी से बचा धरा, क्यों मैं कुम...
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