Thursday, 17 June 2021

प्राण बिन एक देह छोड़ गई हो...

प्राण बिन एक देह छोड़ गई हो...


वो मन्दिर के कायदे

वो जन्मों जन्मों के वायदे,

वो साथ होने की रसमें

वो सच्ची झूठी कसमें।

सब कुछ तो तोड़ गई हो,

प्राण बिन एक देह छोड़ गई हो।

वो रिमझिम सी बरसातें

वो अधजगी सी रातें,

वो कदमों की आहट

वो बाहों की चाहत।

सब कुछ तो तोड़ गई हो,

प्राण बिन एक देह छोड़ गई हो।

वो साँसों का तेज होना

वो बालों की छांव में सोना,

वो कानों की बाली का घूमना

वो होंठों की लाली का चूमना।

सब कुछ तो तोड़ गई हो,

प्राण बिन एक देह छोड़ गई हो।

वो नजर भर देख लेने की जिद

वो बगैर आस की एक उम्मीद,

वो पाने की फरमाइश

वो  छूने की ख्वाहिश।

सब कुछ तो तोड़ गई हो,

प्राण बिन एक देह छोड़ गई हो।

प्राण बिन एक देह छोड़ गई हो।।

                                                 :- संदीप प्रजापति






Tuesday, 1 June 2021

मरीन ड्राइव

मरीन ड्राइव

       "Marine drive is not only a place. It is an emotion."


        हाँ आपने बिल्कुल ठीक पढ़ा। मरीन ड्राइव यह मात्र एक जगह नहीं है यह तो मुम्बईवासियों के लिए एक पूर्ण भावना है। एक ऐसी भावना जिसके अंत का पता ही नहीं। एक ओर विशाल समुद्र तो दूसरी ओर गगनचुंबी इमारतों के बीच बसा यह रास्ता अपने भीतर न जाने कितनी ही कहानियाँ और भावनाएँ समेटे हुए है। दिन-रात समंदर के थपेड़ों को झेलते हुए और अपनी भूजाओं पर आकर्षक इमारतों, होटलों और अस्पतालों को थामे हुए ये कभी नहीं थकता। न जाने कितनी मोटरगाड़ियाँ प्रतिदिन इस पर से गुजरती है पर इसने कभी टिस न भरी। कई दुर्घटनाओं और हादसों को अपने ऊपर झेले हुए आज भी यह हमारे सपनों के शहर की शोभा बढ़ाए हुए है। मानो मुम्बई अगर दिल हो तो उसकी धड़कन मरीन ड्राइव ही है जो हर मुम्बईवासियों में धड़कती है। मुम्बई अगर सपने पूरे करती है तो उन सपनों को देखने का सिलसिला और पूरा करने का हौसला मरीन ड्राइव से ही शुरू होता है। अपनी विशिष्ट शोभा के कारण ही इसे "क्वीन्स नेकलेस" भी कहा जाता है।


         कुछ बच्चे तो अपनी आजीविका के लिए इसी पर निर्भर हैं जो सूंदर-सूंदर गुलाब और गुब्बारे बेचकर अपना जीवन यापन करते हैं। वहीं कुछ लोग यहाँ मोटा पैसा भी कमाते है। खुशी हो, दुख हो या हो कोई उत्सव मुंबईवासी उसे मरीन ड्राइव के साथ जरूर साझा करते है। दीवाली और नए साल जैसा उत्सव तो यहाँ देखने योग्य होता है। बरसात के दिनों में तो मानो ये कोई फिल्मी नजारा ही बन जाता हो। चारों ओर रिमझिम बरसात का आनंद लेते हुए प्रेमी युगल यहाँ कईयों की संख्या में देखने को मिल जाएंगे।



       भोर से लेकर रात्रि तक यहाँ की अपनी एक अलग ही शोभा है जो हर किसी का मन मोह ले। सबेरे का मन को आल्हादित कर देने वाला दृश्य आहाहा ; पंक्षियों की चहचहाहट तो कुछ हवाओं की सरसराहट तो कहीं एक ओर समंदर की खामोशी मनुष्य को आत्मीय शांति का अनुभव करा देती है। योग-व्यायाम करते लोग तो कुछ दौड़ लगाते लोग देखकर मन एक नई ऊर्जा से भर जाता है। यहाँ की चिलचिलाती दुपहरिया भी कुछ कम नहीं है और इस भरी दुपरिया में बर्फ के गोलों, नारियल पानी, पैरों के नीचे गर्म रेत, सिर पर खुले आसमान और मोतियों सी चमकती लहरों का अपना ही आनंद है।



           परन्तु अगर बात की जाए यहाँ की शाम की तो इससे मनमोहक और कुछ नहीं हो सकता। साँझ ढलते ही मोटर गाड़ियों की सरपट दौड़ और लोगों की भीड़ से यह पूरी तरह भर जाता है। मानों कोई उत्सव सा हो। मरीन ड्राइव पर बैठे हुए धीरे-धीरे ढलते सूरज को निहारना, गुलाबी शाम को महसूस करना, समुद्री लहरों से निर्मित मधुर संगीत का रसपान करना और शीतल हवाओं को चेहरे से छूकर गुजरते देना एक बेहद सुखद अनुभव प्राप्त करवाता है। ऐसे सुखद दृश्य को अनुभव करने के लिए यहाँ पर प्रेमी जोड़ों का उमड़ना तो लाजमी ही है, जो अपने प्रेम की सार्थकता के लिए प्रकृति के इस प्रेमलीला को देखने और समझने की कोशिश करते हैं कि कैसे दिन भर का आग बबूला सूर्य शाम होते ही शांत समंदर में जा मिलता है, कैसे समंदर अपनी बाहों को पसारे सूर्य को अपने हृदय में समाहित कर लेता है। कुछ इसी तरह प्रेमी जोड़े भी प्रेम में समाहित हो जाने की कामना करते हुए यहाँ आते हैं और इसका आनंद लेते हैं।



    हाँ तो इसी तरह कुछ सपनों के सौदागर जुझारू लोग जो केवल अपने सपनों के लिए जीते हैं, वे भी इसी सुहानी शाम का अनुभव अपने अंदाज में करते हैं। उनके लिए सूर्य का समंदर को पाना अपने जीवन के लक्ष्य को पाने के समान होता है। वे खुद को सूर्य और समंदर को अपना जीवन लक्ष्य मानकर कर्मपथ पर चलने का सपना देखते हुए इस सुहानी शाम का आनंद लेते हैं।


          यहाँ की रात तो और भी रोमांचक होती है, क्योंकि कहा जाता है कि यह शहर कभी सोता नहीं है। रात में सड़कों किनारे जगमगाते सैकड़ों लाइटें  आसमान में टिमटिमाते सितारों से प्रतीत होते हैं जैसे कि कोई सितारा बिल्कुल ठीक हमारे सिर के ऊपर ही आ चमका हो। तेज रफ्तार गाड़ियों का शोर और ठंड बहती हवाओं का जोर अच्छे-अच्छे सूरमाओं के भी कँपकँपी छुड़वा दे। रात्रि के एक पहर के बाद मन्द हवाएं ,समंदर की हल्की आवाज़ और कुछ सन्नाटा मन को सुकून का आभास करवाता है और दिन भर के थकान को मिटाता है। कुछ इस तरह एक पूरा दिन मरीन ड्राइव पर आनंदमय बिताया जा सकता है।


   हालांकि फिलहाल प्रतिबंधित होने के कारण यहाँ की शोभा में कुछ कमी जरूर आ गयी है लेकिन आशा करता हूँ कि जल्द ही हालात सामान्य होंगे और हम सभी ये आनंद पुनः भोग पाएंगे।


(कोई व्यक्ति इस लेख से सम्बंधित अपना व्यक्तिगत अनुभव, सुझाव, विचार या मार्गदर्शन देना चाहे तो उसका सहृदय स्वागत है।)

Image Source :- Internet and Self Clicked

Sunday, 9 May 2021

माँ

                                     माँ
      
कहा जाता है,
माँ के होने से ही दुनिया की सारी खुशी होती है,
पर उनका क्या जिनकी माँ ही नहीं होती है।
हाँ ये सच है कि हम सब के जीवन में माँ का एक अहम हिस्सा होता है, या यूं कहें कि माँ के बिन जीवन एक बेजान सा किस्सा होता है। माँ के होने मात्र से जीवन की सब तकलीफें दूर हो जाती हैं। 
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धुंधले जीवन में चमकता एक दर्पण जैसी माँ
घोर अंधेरे में भी आशा की एक किरण जैसी माँ
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माँ बिन घर का हर कोना सुना
माँ बिन जीवन में दुख दो गुना
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जीवन के हर पल में दुख और अपमान को पिए है,
सदा वन्दनीय है वो सन्तान जो माँ बिन जिए है।
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माँ की ममता हर किसी को नसीब नहीं होती।
पर नसीब उनका भी होता है,
जिनकी माँ नहीं होती।
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सिर रख गोद में माँ के 
हर कोई चैन की नींद सो नहीं पाता ,
हर किसी की माँ होती है
पर हर कोई माँ का हो नहीं पाता।
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जीवन में माँ का न होना 
जैसे सांस बिन प्राण का होना
जैसे जीव बिन ब्रह्मांड का होना
जैसे जल बिन मछली का होना
जैसे फूल बिन तितली का होना
जैसे आत्मा बिन कंकाल का होना
जैसे परमात्मा बिन संसार का होना
जीवन में माँ का होना सब दिन चांदी सोना
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(प्रत्येक के जीवन में माँ के इतने पहलू होते हैं कि माँ पर किसी एक तरह से लिख पाना नामुमकिन सा लगता है।)


Saturday, 1 May 2021

पहला प्यार

 


♥️ पहला प्यार ♥️


     
           पहला प्यार एक ऐसा शब्द जिसे सुनते ही जेहन में कुछ हो सा जाता हो मानो रगों में रक्त दोगुनी रफ्तार से दौड़ गया हो, दिल की धड़कनें तेज हो गयी हो और सांसे अटक सी गयी हो और फिर अचानक से आंखों के सामने एक ऐसा चेहरा आ जाना जिसे हम चाहकर भी न भूलना चाहे। 
           पहला प्यार हर इंसान के जीवन में एक खास एहमियत रखता है, चाहे वो किसी भी उम्र में हुआ हो। पहले प्यार की वो बचकानियाँ, नादानियाँ और वो फुले न समाने की भावना भला कौन बिसर सकता है। पहले प्यार का अनुभव होते ही खुद को सातवें आसमान पर देखना, चाँद - तारों से बातें करना और मौसम का अत्यधिक सुहाना होना ये सब तो पहले प्यार को और सुखद बनाती है। पहला प्यार चाहे जीवन भर साथ रहे या न रहे मगर उसकी वो मीठी सी यादें जरूर जीवन भर साथ रहती हैं और जीवन को एक नया ही आनंद प्रदान करती रहती है।

Monday, 1 March 2021

प्रेम और समर्पण

                एक लड़का था जो कि अपनी परेशानियों में ही अकेला मस्त था। उसे अकेलेपन में ही खुशी मिलती, दुनिया के झमेलों से वो दूर ही रहता। प्यार, इश्क़,मोहोब्बत की कहानियाँ उसे  पसंद तो बहुत थी पर खुद ही खुदको इन सब से बहुत दूर रखता था। डरता था वो खोने से व्यक्ति को नहीं अपने अंदर निहित प्रेम को खोने से। इसीलिए उसने खुद को किसी के प्रेम में पड़ने और किसी को प्रेम करने से बचा के रखा था। 
            एक सामान्य और अच्छा जीवन बीत रहा था। तभी उसे उसकी एक सहपाठी से प्रेम हो जाता है। उसने अपने प्रेम का इज़हार भी किया और उसे ये जानकर अत्यधिक प्रसन्नता भी हुई की वो भी उससे प्रेम करती है। दोनों का प्रेम प्रसंग काफी अच्छा चल रहा था और दोनों ही बहुत ज्यादा खुश और आनंदित थे। एक सामान्य प्रेमी जोडे की तरह दोनों एक दूसरे से बेहद प्रेम करते। परन्तु ये सब कुछ ज्यादा दिनों तक न चला धीरे-धीरे  लोगों को पता चलने लगा और उन पर पाबन्दियाँ लग गयीं। अब न वो एक दूसरे से बात कर सकते और न मिल ही सकते। कुछ समय तक दूरियाँ ऐसे ही बनी रही है।
                   इसी बीच एक दिन एकाएक लड़के को पता चलता है कि उसकी प्रेमिका ने किसी और से सगाई कर ली है और कुछ ही समय में शादी भी हो जाएगी। वह तो एकदम से चौंक कर ही रह गया। उसे कुछ नही सूझता की अब वो क्या करे। उसकी हालत जल बिन तड़प रहे किसी मछली सी हो गयी। बुरी हालत तो उसकी तब होती जब वो अपनी प्रेमिका को अपने सामने ही देखता लेकिन उससे बात तक नहीं कर सकता ताकि उसे लोकलाज से बचा सके। प्रेमिका ने भी अपना किरदार बखूबी निभाया एक बेदर्दी की तरह उसे खूब तड़पाया। इन सब से सहम कर लड़के ने इसे ही अपना भाग्य समझ लिया और मन ही मन अपनी प्रेमिका की खुशी की कामना करते हुए अपने भीतर निहित ईश्वरीय प्रेम का गला घोंट दिया और खुद को प्रेम में हारा हुआ व्यक्ति समझने लगा।


(दोस्तों कहानी छोटी जरूर है परंतु सन्देश गहरा है और मुझे पूरा विश्वास है कि आप लोग जरूर समझोगे।)

(जीवन में हमेशा जरूरी नहीं कि हम जिससे प्रेम करते हैं वो व्यक्ति भी हमसे उतना ही प्रेम करे जितना कि हम उससे करते हैं या मान  लो की वो करता भी है फिर भी ये तो जरुरी नही की वो ही आपका जीवनसाथी हो या वो जीवन भर आपका साथ निभाए। और अगर सच्चा प्रेम पा लेना इतना ही आसान होता तो भगवान श्रीकृष्ण राधारानी को न पा लेते क्या। इसीलिए हमें मान लेना चाहिए कि ईश्वर के कुछ फैसले हमें वर्तमान में तो बहुत दुख देते हैं पर वो हमारे भविष्य के लिए एकदम ठीक होते हैं।)

(दोस्तों आपसे एक सवाल आपको क्या लगता है उस लड़के ने ठीक किया या फिर उसे अपना प्रेम पाने के लिए लड़की से वाद-विवाद करना चाहिए था ताकि हंगामा हो और उसकी शादी में बाधा पड़ सके। दोस्तों जवाब जरूर दीजियेगा और हाँ कमेंट में अपना नाम लिखना मत भूलना जिससे मैं आपको जान सकूँ।)

धन्यवाद🙏
राधे राधे
जय श्रीकृष्ण

Thursday, 7 January 2021

तू भी जीत जाएगा...

 तू भी जीत जाएगा...


क्या पता था कि 
जीवन में एक दौर ऐसा भी आएगा ,
न हम किसी के अपने रहेंगे
और न कोई हमारा सगा रह जाएगा।

जिंदगी की उठा पटक में 
कोई दोस्त कोई साथी काम न आएगा ,
सुख दुख की सौगात में
जीवन का ये सफर ऐसे यूँही गुजर जाएगा।

लाख घना अंधेरा हो
फिर एक नया सबेरा जरूर आएगा,
रख हौंसला इस पल
इन उलझनों से क्या तू हार जाएगा।

एक दिन ऐसा होगा
तू भी इतिहास रच आएगा,
लोगों की भीड़ से परे
जग में तू भी जाना जाएगा।

फिर तू मुस्कुराएगा।
फिर तू जीत जाएगा।।
                                             
                                              :- संदीप

Monday, 23 November 2020

प्रेम

"प्रेम के बदले में प्रेम पाने की ईच्छा करना ही मनुष्य के दुख का सबसे बड़ा कारण है। प्रेम तो  केवल देने का नाम है, प्रेम में अगर वापस पाने की ईच्छा की जाए तो वह प्रेम न रहकर सौदा बन जाए। लेकिन दुख तो तब होता है जब आपने अपना सारा प्रेम निश्छल भावना से किसी पर  लुटा दिया हो और उसे इस बात की कद्र भी न हो।"

Wednesday, 18 November 2020

पंक्तियाँ प्रेम की

न जाने कब तू मुझमें मुझसे ज्यादा सी हो गई

जाने कैसे लोग कई सारी मोहोब्बतें करते हैं,
हमसे तो एक ही न भुलाई जा रही।

याद तेरी यूँ ही रुलाई जा रही।

नही भुला जा रहा वो तेरा ऐंठना,
नही भुला जा रहा वो मेरा चुमना।

नहीं भूली जा रही वो तेरी मीठी सी बातें,
नहीं भूली जा रही वो मेरी अधजगी सी रातें।

नहीं भुला जा रहा तेरे बालों को धुलाना,
नहीं भुला जा रहा मेरे गालों को सहलाना।

नहीं भूली  जा रही तेरी बचकानियाँ,
नहीं भूली जा रही मेरी नादानियाँ।

नहीं भुला जा रहा तेरा वो नाम,
नहीं भुला जा रहा मेरा वो शाम।

नहीं भूली जा रही तेरी संगत,
नहीं भूली जा रही मेरी रंगत।

हो अगर मिलन दुबारा तो सीता राम सा हो,
वरना बिछड़न हमारा तो राधा श्याम सा हो।


Monday, 2 November 2020

RAPE MUKT SANSAAR

#बलात्कार😰😰

#Rape......😢😢

आज एक बच्चा भी जानता है कि रेप क्या होता है? कैसे होता है? हाँ लेकिन किन कारणों से होता है, कारण नहीं जानता। सच कहें तो ये कोई नही जानता न जानने का प्रयत्न करता।

खैर लोग कहते हैं कि रेप क्यों होता है??? कौन जिम्मेदार है इसका! लड़कियों का पाश्चात्य पहनावा, लडकों की घटिया मानसिकता या सरकार की सुस्त नीतियाँ??
लेकिन क्या मात्र यही सब इन बढ़ती रेप औऱ acid attack जैसी घटनाओं के जिम्मेदार है।
कहते हैं रेप का कारण लड़कों की मानसिकता है लेकिन वो आयी कहाँ से???
बीते समय में शुरुआती 4-5 साल का बच्चे क्या देखते सुनते बड़े होते थे, बुजुर्गों की बातें, टीवी पर माल गुडी डेज, शक्तिमान, चित्रहार, रामायण, महाभारत। और आज उसी उम्र के बच्चे क्या देख सुन रहे है? टीवी पर आइटम न०(कुंडी मत खड़काओ राजा, मुन्नी बदनाम, प्यार दो प्यार लो आदि) अश्लीलता की हद्द पार करती हुई फिल्में(सभी वाकिफ हैं), double meaning vulger comedy, सीरियल आदि...
और बची कुची कसर ये विज्ञापन पूरी कर देते हैं, पूरा दिन प्रचार के लिए बेहद घटिया विडियो क्लिप टैग लाइन्स के साथ Set wet gel(नही लगाया तो लड़की नही पटेगी), close-up(पास आने का मौका), innerwear(खुशबू वाली), body sprey(कोई दूर न रह पाए), neha swaha-sneha swaha(ठंडी में गर्मी का एहसास) आदि हद से ज्यादा....
इनसे भी और अलग पाखंड ज्योतिषी विद्या- बाबा बंगाली, तंत्र, मनचाहा प्यार पाए, स्त्री वशीकरण आदि के विज्ञापन।।

*Over all जब हर विज्ञापन हर फ़िल्म, सीरियल, गाने में केंद्र बिंदु और भोगविलास की वस्तु लड़की होती है। तो ऐसे में इन कृत्यों को बढ़ावा मिलना निश्चित है। ऐसी घटनाओं के पीछे निश्चित रूप से ये बाज़ारवाद जिम्मेदार है।

कुल मिलाकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में कुछ भी परोसा जाता है। और उसे सभी सहर्ष स्वीकारते हैं।
लेकिन गलती इनकी भी नहीं है क्योंकि आप ख़रीददार हैं। इनके दर्शक हैं, आपका मनोरंजन करना इनका काम है जिसमे बर्बाद होने के लिए पैसे भी आप अपनी जेब से देते हो।
लेकिन ये सब देख के हमारा खून नही खौलता, तब हमें गुस्सा नहीं आता?? इसका विरोध हम कभी नहीं करते क़भी कैंडलमार्च नहीं करते।

हमें लगता है रेप, acid attack, harrasmant  रोकना सरकार, पुलिस  प्रशासन और न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी है।। क्यों??? रेपिस्ट बनाये ये टीवी, फ़ोन,  बॉलीवुड, सोशल मीडिया,आपका आस पास का माहौल और जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की? क्या समाज, मीडिया, और हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं?? इन सबकी जड़ टीवी चैनल्स, बॉलीवुड, मीडिया को कुछ नही कहेंगे आप। क्योंकि वो मनोरंजन करते हैं आपका??

हम सरकार पर गुस्सा ऐसे निकालते हैं जैसे उसने ही रेप एजेंट छोड़ रखे हैं समाज में। और जिस तरह ये वारदातें बढ़ रही हैं, एक लड़की के साथ रेप की वारदात पर हम क्रोधित हो जाते हैं, जोर शोर से सोशल मीडिया पर हल्ला मचाते हैं, dp बदल लेते हैं, कैंडिल मार्च निकालते हैं, न्याय की मांग करते हैं, और सजा के तौर पर रेपिस्ट की फांसी औऱ अनकॉउंटर पर खुश हो जाते हैं पटाख़े फोड़ते हैं कुल मिलाकर दिल को ये तसल्ली देते हैं कि न्याय हुआ, पर क्या ये काफी और सही है?????

इन सब में कुछ पाना तो दूर हम खो क्या रहे हैं क्या कभी ग़ौर किया???? खो रहे हैं हम अपने देश का भविष्य, एक रेपपीडिता लड़की, और एक रेपिस्ट लड़का, जो कल को इस देश का भविष्य बनते। रेपिस्ट के लिए अखंड गुस्सा वहीं पीड़िता के लिए सहानुभूति,, पर क्या वो लड़का ये सब सीख के धरती पर आया था ?? क्या उसके द्वारा किये कुकृत्य की जड़ वो स्वयं था?? वो थी आज के भागदौड भरे जीवन की ओछी मनोस्थिति। उसे ऐसा बनाया इस बाज़ारवाद ने, परिवार ने...

बच्चों के सामने उभरते ये निंदनीय मुद्दे, खो रहे हैं हम अपने देश की शांति व्यवस्था, दिन रात यहीं सब टीवी, मीडिया, सोशल साइट, आस पास यही बाते। भारत कितना ही विकास कर ले लेकिन इन् घटनाओँ के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर में उसकी साख बनना नामुमकिन है।

आज बच्चों का बचपन दादी दादी के साथ कहानी सुनते हुए नहीं ये सब बातें सुनते हुए बीत रहा है, आज वो सामूहिक परिवार मे नहीं रहते बल्कि अकेलेपन को दूर करने के लिए फोन पर विडियो, और फ़िज़ूल लोगों का सहारा लेते हैं।(helo, azar, tinder, finder)
आज बच्चे अपनेपन का मतलब नहीं अकेलेपन का मतलब जानते हैं।। और उसे ही दूर करने के लिए इन सबमें फसते जाते हैं।

आप कितने ही कठोर सख्त कानून बना लीजिये जब ये सब आज हमारे माहौल और समाज का हिस्सा है तो ये घटनाएं न रुकी हैं, न रुकेंगी।
*बल्कि दुःख हो रहा है कहते हुए कि ये तो शुरुआत है अभी।*

अगर अपनी बेटियों को बचाना है तो सरकार कानून से निकलकर ये भड़काऊ सोशल मीडिया साइट्स की गंदगी साफ करने की जरूरत है।
*मैं किसी के पहनावे को गलत नहीं कहता लेकिन अच्छा पहनना और फूहड़, बेहुदा पहनना दो अलग बाते हैं।*  जगह के अनुसार पहनें और खुद को ढालें। औऱ इसी तरह लड़कों को भी समझना पड़ेगा कि हर लड़की मौका नही जिम्मेदारी है। उसे निभाने की कोशिश तो करें। *(स्वयं की मोमबत्ती जलाने के लिए दूसरों के घर न जलाएं।)*

रेप रोकना सरकार का काम नहीं आपके परिवार में मिले संस्कारों का है। चाहे लड़का हो या लड़की सीमाएं और नियम दोनों के लिए बराबर हों।

सुधरने की जरूरत न सिर्फ सरकार को है ना लड़कों को है ना लड़कियों को है, समाज खुद से भी अपनी समस्या का समाधान कर सकती है।

अब वक्त की मांग है कि सभी अपने आप को अपने स्तर पर सुधारें। क्योंकि ये घटनायें किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं हैं अपितु हर आयु वर्ग की नारी इससे जूझ रही है।

जितना गुस्सा और विरोध एक बलात्कारी व्यक्ति के लिए होता है उसका आधा भी हम इस सोशल मीडिया और ओछे बॉलीवुड की फैलाई दुष्प्रवृत्तियों के खिलाफ दिखाये तो समस्या का कुछ हद्द तक निदान हो सकता है।
*कदम उठाने से ही रास्ते तय होते हैं, सोचने से मंजिले पास नही आती।*

वादा करिये खुद से कि किसी न किसी रूप में अपनी *मानसिकता, अपने समाज को ऊंचा व साफ रखेंगे।

जीवन में सुधार निर्णय करने से नहीं निश्चय करने से होते हैं। क़्योंकि युद्ध बंदूकों से नही उन कन्धों से जीते जाते हैं जो उन्हें चलाते हैं।।*

*मौत भले ही आँकड़ों का खेल होती हो पर जिंदा लोग आँकड़े नही होते वो धड़कते हुए सपने होते हैं, उम्मीदें होती हैं क्योंकि वो जिंदा होते हैं।*

(यहाँ किसी की भावनाओं को आहत करने का उद्देश्य नहीं है, न ही किसी के फेवर में कही बात है, तो कृपया शब्दों से ज्यादा भावना को समझने का प्रयत्न करें।)
(COPIED)

एक संगिनी

एक संगिनी तुम्हारा मिलना  जीवन को एक नई आस देता है, घोर अंधेरे में विहंगम उजला कोई प्रकाश देता है। तुम तब आई जब युद्ध मैं हार चुका था, निराश...