Wednesday, 17 November 2021

एक तलाश जारी है...

एक  तलाश जारी है...

ये तुम हो
या मेरे ख्वाबों ने
तुम्हारी तस्वीर उतारी है।

वो मासूम चेहरा
गोरे गाल
और आँखें भी तो कजरारी है।

वो सादगी  मिजाज
गुलाबी होंठ
और बोली भी तो न्यारी  है।

वो अल्हड़ जवानी
गठीला बदन
और चाल भी तो मतवारी है।

वो पतली कमर
ऊँचा कद
और मोहोब्बत भी तो करारी है।

वो चांदनी सुंदरता
बेदाग चरित्र
और पवित्रता भी तो सारी की सारी है।

सच कहना तुम ऐसी ही हो या,
मेरी कल्पनाओं में एक तलाश जारी है।

                                                 :- संदीप प्रजापति


(अपनी कल्पनाओं में प्रेम का एक चेहरा बुनना और उसी से अथाह प्रेम करना भी एक आनन्द है। प्रेम करने के लिए आपके पास किसी के एक वास्तविक शरीर का होना ही आवश्यक नहीं है। आप किसी स्थान, वस्तु, विचारों या स्मृतियों से भी भरपूर प्रेम कर सकते हैं जो आपको ईश्वरीय प्रेम का अनुभाव कराता रहेगा।)








Tuesday, 16 November 2021

एक सवाल

                                 एक सवाल


एक सवाल है
जवाब बताओगी क्या...

बंदिशें कितनी ही हो
तुम दौड़ी चली आओगी क्या...
रूठूँ जो कभी तुमसे
तुम प्यार से मनाओगी क्या...

थक जो मैं जाऊँ
सिर गोदी में रखकर सुलाओगी क्या...
प्रेम जितना हो तुममे
सारा प्रेम मुझपर लुटाओगी क्या...

आज ख्वाबों में आई हो
कल बाहों में भी आओगी क्या...
तुम्हारी इन हथेलियों पर
मेहँदी हमारी रचाओगी क्या...

मांग में अपनी 
हमारा सिंदूर सजाओगी क्या...
फेरे पूरे सात लेकर
सात जन्मों का साथ निभाओगी क्या...

मैं जीवन भर इंतज़ार कर लूँ
बस एक बार कह दो तुम आओगी क्या...
सुनो इस बंजर मन में
प्रेम का उपवन लगा के छोड़ जाओगी क्या...

                                                  :- संदीप प्रजापति

(मन मे कुछ आशंकाएं लिए कल्पनाओं की दुनिया में प्रेम का बसेरा ढूंढ रहा एक प्रेमी। प्रेम पा लूँ या प्रेम जी लूँ बस इसी द्वंद्व में उलझा हुआ है। ) 



Saturday, 30 October 2021

याद

                     याद

वो पहला स्पर्श याद आया होगा,
वो पहला निष्कर्ष याद आया होगा।
वो पहली बरसात याद आयी होगी,
वो पहली मुलाकात याद आयी होगी।
वो पहला चुम्बन याद आया होगा,
वो पहला क्रंदन याद आया होगा।
वो पहली दफा राहों में आना याद आया होगा,
वो पहली दफा बांहों में आना याद आया होगा।
वो पहले यार का याराना याद आया होगा,
वो पहले प्यार का खजाना याद आया होगा।
लाखों होंगे उसके चाहने वाले अब भी,
फिर भी उसे गुजरा जमाना याद आया होगा।
जब भी वो किसी नए आशिक़ से मिलती होगी,
बस वही आशिक़ पुराना याद आया होगा।

                                                       :- संदीप प्रजापति

(प्रेम में पूर्णतः समाहित एक व्यक्ति हमेशा इसी कल्पना में रहता है कि शायद उसके प्रेमी ने जीवन में एक न एक बार तो किसी न किसी अवसर पर उसे याद तो जरूर किया होगा या किसी घटना ने उसे उसकी याद दिला दी होगी और कुछ भूली बिसरी स्मृतियों ने उसके भी हृदय को गुदगुदाया होगा। वो एक ही आश में रहता है कि हम दोनों एक ही दुनिया में है, जीवन के किसी न किसी छोर पर भेंट तो होगी ही फिर पूछूंगा कभी मेरी याद आयी थी?)


Thursday, 28 October 2021

प्यार में लड़के

                           प्यार में लड़के



            लड़कियों तुमको भी किसी लड़के से प्यार तो हुआ ही होगा। पर क्या तुमको कभी किसी लड़के के शर्ट से,पैंट से,घड़ी से,बालों से या उससे जुडी किसी भी चीज से कभी प्यार हुआ है?
नहीं न।
हम लड़को को हुआ है।
       तुमसे भी हुआ है और तुम्हारी हर उस चीज़ से हुआ है जो तुमसे होकर गुजरती हो। तुम्हारे कपड़ों से लेकर जूते ,चप्पलों को भी हम लड़के इतनी बारीकी से प्यार कर जाते हैं जैसे उसमें भी तुम ही समाई हो। तुम्हारे इश्क़ को पाने में तुमसे जुड़ी हर उस चीज़ से इश्क़ कर बैठते हैं, जिसका लड़कों के जीवन में कभी कोई महत्त्व ही न हो। पर क्या करें एक तुमको रिझाने में ये सब भी करना पड़ता है। कभी तुम्हारे टूटे बालों को ही सहेज लेना तो कभी तुम्हारे होंठो की लाली का रंग याद कर लेना भी हमें तुम्हारे प्यार का भागी बना देता है। तुम्हारी दिनचर्या को रटने में अपनी दिनचर्या भूला बैठते है,क्या करें तुमसे प्यार जो कर बैठते हैं। कभी तुमको एक झलक देख लेने के लिए सारा दिन गवां देने में भी किसी दिहाडी के मजदूर सी खुशी को पा लेते हैं जिसके दिन भर की मजदूरी तुम्हारी एक झलक जैसी हो। तो कभी भीड़ से गुजरते हुए भी तुम्हारी इत्र की खुशबू को पहचान लेते हैं। तुम्हारे जुड़ों से लेकर जूतों तक कि सारी चीज़ों की महीनता को याद कर जाते हैं, बस एक दफा मुस्कुराकर देख लोगी इसी आश में जवानी बर्बाद कर जाते हैं। गिनाने को तो ऐसी बहुत सी चीजें है जो लड़के सिर्फ तुमसे आकर्षित होकर ही कर जाते हैं। खैर तुमने कभी इन बातों को न जाना हो मगर एक तुमको चाहने में लड़के तुम्हारे साथ साथ सब कुछ चाहने लग जाते हैं।


(प्रेम या आकर्षण में आकर ऐसी कई बेतुकी बातें है जो लड़के किसी लड़की के लिए कर जाते हैं परंतु एक निश्चित कालावधि के बाद उनको स्वतः ही बोध हो जाता है कि वो कितना बचकाना और मूर्खतापूर्ण व्यवहार किसी लड़की के आकर्षण में कर गए थे।)

Sunday, 24 October 2021

पहली मोहोब्बत

                           पहली मोहोब्बत


बांहो में सिमटकर 
जब सीने से लगाया होगा,
पागलपन सिर्फ मेरा ही नही
इश्क़ ने पागल तुम्हे भी बनाया होगा।

दिल सिर्फ मेरा ही नही बैठा होगा
कदम तुम्हारे भी डगमगाए होंगे,
प्रेम कहानी अधूरी लिखने में
हाथ तुम्हारे भी थरथराए होंगे।

यूँ ही नही चांदनी रात में
तुम सिर्फ अलविदा कहने आयी होगी,
उस आखिरी चुम्बन पर 
आँखें तो तुम्हारी भी भर आयी होगी।

कहीं और से तुमने भी
पहली मोहोब्बत का एहसास पाया होगा,
मेरी पहली मोहोब्बत तुम ही थी जानोगी तब 
जब मेरे बाद तुमको मेरा प्यार समझ आया होगा।

                                              :- संदीप प्रजापति

Saturday, 9 October 2021

नौकरी

नौकरी


काम पसन्द हो न हो,
फिर भी काम कराती है।
ऊंचे ऊंचे लाखों सपनों को,
चंद रुपयों से मार गिराती है।
कभी घर परिवार से तो,
कभी अपनों से दूर कराती है।
कई अनजान चेहरों से मिलाती है,
हाय... ये नौकरी क्या क्या कराती है।

न मरने देती है,
न ही जिलाती है।
भर दिन दौड़ाती है,
नींद कहाँ आने देती है।
सैकड़ों झूठ बुलाती है,
सहपाठियों से लड़ाती है।
बाबूओं के तलवे भी चटाती है,
हाय... ये नौकरी क्या क्या कराती है।

कुछ जिंदगी से लड़ने को,
तो कुछ जिम्मेदारियों के नाते।
गैरों की चाकरी करते हैं,
हाँ हम भी नौकरी करते हैं।
पर इन सब से दूर,
हमने भी कई सपने पाल रखे हैं।
जीवन भर यूँ ही,
नौकरी ही न करते रहने का ख्याल रखे हैं।
कुछ कठोर फैसलें होंगें,
हालातों से ऊंचे हमारे हौसलें होंगे।
एक दिन हम भी बाबू साहब होंगे,
हमारी भी लोग नौकरी करेंगें।

                                           :- संदीप प्रजापति


(हालातों के चलते न चाहते हुए भी मन मार के नौकरी करने वाले सभी लोगों को समर्पित।)

Tuesday, 14 September 2021

आईना होना चाहता हूँ...

आईना होना चाहता हूँ...

रिश्तों के इस बाजार में
मैं भी एक कोना चाहता हूं,
खेल सकूँ किसी के दिल से 
मैं भी एक खिलौना चाहता हूँ।

त्याग सभी लक्ष्यों को
मैं भी बाबू शोना चाहता हूँ,
हंसती खेलती जिंदगी में
मैं भी रंडी रोना चाहता हूँ।

वादे निभा न सकूँ 
पर साथ सोना चाहता हूँ,
सौ थालियों में खाऊँ
पर कह दूं कि सिर्फ तेरा होना चाहता हूँ।

शब्द मेरे है पर
मैं ये भावना खोना चाहता हूँ।,
सच कहता हूँ मैं तो
बस समाज का आईना होना चाहता हूँ।
:- संदीप प्रजापति

( व्यक्तिगत भावनाओं को आहत करना उद्देश्य नहीं है।)

Sunday, 29 August 2021

ललही छठ पूजा

       मुख्यतः बिहार के सुप्रसिद्ध छठ महापर्व के बारे में तो हम सब जानते हैं , लेकिन आज मैं आपको एक और छठ पूजा के बारे में बताऊँगा जिसे ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है जो कि उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बड़े ही आस्था से मनाया जाता है।
    बचपन से ही माता जी को छठी मैया का व्रत करते देखते आ रहे हैं।  बाल्य काल में तो व्रत का अर्थ सुबह सुबह खुरपी लेकर पापा के साथ उनकी साईकिल पर बैठकर कुश, पलाश और महुआ के पत्तों को(शहर् में कुश और पलाश को ढूँढना किसी पहाड़ तोड़ने से कम नहीं है) ढूँढ कर लेकर आना बड़ा ही रोमांचक अनुभव रहता था।  फिर सुबह पूजा में मिलने वाला प्रसाद और  दोपहर के समय मां के बनाए हुए देशी घी में बने तिन्नी के चावल का खाना बहुत ही अविस्मरणीय अवसर हुआ करता था। वक्त बदल गया आने जाने के साधन बदल गए बस नहीं बदला तो मां का वह हर वर्ष है षष्ठी पर रखे जाने वाला व्रत। 

आज संपूर्ण देश में हल षष्ठी(बलराम जयंती) का पर्व मनाया जा रहा है। बलराम जयंती हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को बलराम जयंती मनायी जाती है। यह व्रत माता अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए करती हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में हलषष्ठी को कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसे लह्ही छठ, हर छठ, हल छठ, पीन्नी छठ या खमर छठ भी कहा जाता है।

बलराम जयंती 2021

हलषष्ठी व्रत
28 अगस्त 2021, दिन शनिवार 

षष्ठी तिथि प्रारंभ
27 अगस्त 2021 को शाम 06:50 बजे

षष्ठी तिथि समाप्त
28 अगस्त 2021 को रात्रि 08:55 बजे

मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण जी के भाई बलराम जी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में हलषष्ठी व्रत मनाने की परंपरा है। यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। क्योंकि बलराम जी का प्रधान शस्त्र हल और मूसल है। इसलिए उन्हें हलधर भी कहा जाता है। और उन्हीं के नाम पर इस पावन पर्व का नाम हल षष्ठी पड़ा है।

हल षष्ठी के दिन माताओं को महुआ की दातुन और महुआ खाने का विधान है। इस व्रत में हल से जोते हुए बागों या खेतों के फल और अन्न खाना वर्जित माना गया है। इस दिन दूध, घी, सूखे मेवे, लाल चावल(तिन्नी का चावल),करमुए(नदी ,तालाब में पाए जाने वाला एक प्रकार का साग) आदि का सेवन किया जाता है।

इस व्रत को नवविवाहित स्त्रियां भी संतान की प्राप्ति के लिए करती हैं। और माता संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत को करती हैं।

इस व्रत की पूजा करने से पहले प्रात:काल स्नान आदि से निवृत्त हो जाना चाहिए। और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। और गाय के गोबर से जमीन को लीपकर छठी मैया का स्वरूप पूजा स्थल पर बना लें। इसके बाद वहीं भूमि में महुआ, कुश और पलाश की एक-एक शाखा बांधकर गाड़ दें और उसके बाद इनकी पूजा करें।

विशेष नोट - इस व्रत में कोई भी एसी चीज़ नहीं खाई जा सकती जिसकी पारंपरिक रूप से खेती की जाती है। 

जय छठी मैया।। 
श्री चरणों का दास- सुनील कुमार मिश्रा 

छवि -माता जी द्वारा छठी माता स्थापना और पूजन।

साभार :- सुनील कुमार मिश्रा की पोस्ट से
(रामायण सन्देश)

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Wednesday, 21 July 2021

जिसने प्रेम को खोया है...

                        जिसने प्रेम को खोया है...

उनसे क्या पूछना
जिसने जिस्मों को पाया है,
प्रेम का अर्थ उनसे पूछो 
जिसने प्रेम को खोया है।

लोकबाग में हंसकर 
चाँदनी रातों में रोया है,
दिन रैन जागकर
नम आँखों में सोया है।

एक पल मिलने को
अपना सारा दिन गंवाया है,
एक झलक दिखने को
अपना सारा खून जलाया है।

अपमानित होकर भी
जिसने प्रेम निभाया है,
प्रेमिका की खुशी के लिए
जिसने प्रेम बलि चढ़ाया है।

उनसे क्या पूछना
जिसने जिस्मों को पाया है,
प्रेम का अर्थ उनसे पूछो 
जिसने प्रेम को खोया है।
जिसने प्रेम को खोया है।।
















क्या वो प्यार भुला पाओगे...

                      क्या वो प्यार भुला पाओगे...

जिसकी खातिर
गलियों का 
चक्कर लगाया 
उसी ने
ठुकराया 
छोड़ हाथ 
मोहोब्बत का
उसने
पैसों को अपनाया 
जाओ 
खुश रहना 
इस दौलत में
मगर जान लो
तरस जाओगे
किसी की 
सच्ची मोहोब्बत में
सब कुछ 
तो पा जाओगे
लेकिन वो
प्यार कहाँ
से लाओगे
जब प्यास जगेगी
मोहोब्बत की 
तब भी 
क्या तुम 
पैसे ही खाओगे
सच कहना 
हमको तो 
भूल जाओगे
पर क्या वो
प्यार भुला पाओगे।

Sunday, 11 July 2021

एक दौर जवानी है...


                            एक दौर जवानी है...


कुछ बिखर गए 
कुछ निखर गए,
कुछ ने इसकी ही जिद ठानी है
इसकी सबपे मनमानी है।
एक दौर जवानी है।।

किसी में जोश जगाए
किसी के होश उड़ाए,
किसी की ये ख्वाहिश पुरानी है
इसकी सबपे मनमानी है।
एक दौर जवानी है।।

कुछ के खेलकूद छूटे
कुछ के हिस्से जिम्मेदारियां फूटे,
कुछ के बचपने की विदा निशानी है
इसकी सबपे मनमानी है।
एक दौर जवानी है।।

कहीं दिल धड़काए
कहीं दिमाग आजमाए,
कहीं तो बस इसकी ही रवानी है
इसकी सबपे मनमानी है।
एक दौर जवानी है।।

कभी प्रौढ़ता का कदम
कभी हार जीत का परचम,
कभी जिंदगी की खूबसूरत कहानी है
इसकी सबपे मनमानी है।
एक दौर जवानी है।।

कभी छूटता आँगन
कभी पकड़ता कफ़न,
कभी आंखों का बहता पानी है
इसकी सबपे मनमानी है।
एक दौर जवानी है।।

कुछ जूझ गए
कुछ बुझ गए,
कुछ तो इससे रूठ गए
पर इसने कहाँ सबको मनानी है।
इसकी सबपे मनमानी है
एक दौर जवानी है,
सबको आनी है
आकर चली जानी है।
एक दौर जवानी है।।

                                          :- संदीप प्रजापति

( ऊर्जा, उल्हास और उत्तेजना से भरी जवानी का
हम के जीवन में प्रवेश होता है, जो जिंदगी को और खूबसूरत बना देती है। जवानी जिंदगी को एक नए आयाम पर पहुंचाने का मौका और साहस प्रदान करती है। जो व्यक्ति इसका सही इस्तेमाल कर ले जाता है, वो जीवन में सफल हो जाता है और जो इसका इस्तेमाल केवल कामना पूर्ति के लिए करता है, वो स्वयं अपना नाश करने का रास्ता खोज लेता है।)

एक संगिनी

एक संगिनी तुम्हारा मिलना  जीवन को एक नई आस देता है, घोर अंधेरे में विहंगम उजला कोई प्रकाश देता है। तुम तब आई जब युद्ध मैं हार चुका था, निराश...