Saturday, 9 October 2021

नौकरी

नौकरी


काम पसन्द हो न हो,
फिर भी काम कराती है।
ऊंचे ऊंचे लाखों सपनों को,
चंद रुपयों से मार गिराती है।
कभी घर परिवार से तो,
कभी अपनों से दूर कराती है।
कई अनजान चेहरों से मिलाती है,
हाय... ये नौकरी क्या क्या कराती है।

न मरने देती है,
न ही जिलाती है।
भर दिन दौड़ाती है,
नींद कहाँ आने देती है।
सैकड़ों झूठ बुलाती है,
सहपाठियों से लड़ाती है।
बाबूओं के तलवे भी चटाती है,
हाय... ये नौकरी क्या क्या कराती है।

कुछ जिंदगी से लड़ने को,
तो कुछ जिम्मेदारियों के नाते।
गैरों की चाकरी करते हैं,
हाँ हम भी नौकरी करते हैं।
पर इन सब से दूर,
हमने भी कई सपने पाल रखे हैं।
जीवन भर यूँ ही,
नौकरी ही न करते रहने का ख्याल रखे हैं।
कुछ कठोर फैसलें होंगें,
हालातों से ऊंचे हमारे हौसलें होंगे।
एक दिन हम भी बाबू साहब होंगे,
हमारी भी लोग नौकरी करेंगें।

                                           :- संदीप प्रजापति


(हालातों के चलते न चाहते हुए भी मन मार के नौकरी करने वाले सभी लोगों को समर्पित।)

Tuesday, 14 September 2021

आईना होना चाहता हूँ...

आईना होना चाहता हूँ...

रिश्तों के इस बाजार में
मैं भी एक कोना चाहता हूं,
खेल सकूँ किसी के दिल से 
मैं भी एक खिलौना चाहता हूँ।

त्याग सभी लक्ष्यों को
मैं भी बाबू शोना चाहता हूँ,
हंसती खेलती जिंदगी में
मैं भी रंडी रोना चाहता हूँ।

वादे निभा न सकूँ 
पर साथ सोना चाहता हूँ,
सौ थालियों में खाऊँ
पर कह दूं कि सिर्फ तेरा होना चाहता हूँ।

शब्द मेरे है पर
मैं ये भावना खोना चाहता हूँ।,
सच कहता हूँ मैं तो
बस समाज का आईना होना चाहता हूँ।
:- संदीप प्रजापति

( व्यक्तिगत भावनाओं को आहत करना उद्देश्य नहीं है।)

Sunday, 29 August 2021

ललही छठ पूजा

       मुख्यतः बिहार के सुप्रसिद्ध छठ महापर्व के बारे में तो हम सब जानते हैं , लेकिन आज मैं आपको एक और छठ पूजा के बारे में बताऊँगा जिसे ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है जो कि उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बड़े ही आस्था से मनाया जाता है।
    बचपन से ही माता जी को छठी मैया का व्रत करते देखते आ रहे हैं।  बाल्य काल में तो व्रत का अर्थ सुबह सुबह खुरपी लेकर पापा के साथ उनकी साईकिल पर बैठकर कुश, पलाश और महुआ के पत्तों को(शहर् में कुश और पलाश को ढूँढना किसी पहाड़ तोड़ने से कम नहीं है) ढूँढ कर लेकर आना बड़ा ही रोमांचक अनुभव रहता था।  फिर सुबह पूजा में मिलने वाला प्रसाद और  दोपहर के समय मां के बनाए हुए देशी घी में बने तिन्नी के चावल का खाना बहुत ही अविस्मरणीय अवसर हुआ करता था। वक्त बदल गया आने जाने के साधन बदल गए बस नहीं बदला तो मां का वह हर वर्ष है षष्ठी पर रखे जाने वाला व्रत। 

आज संपूर्ण देश में हल षष्ठी(बलराम जयंती) का पर्व मनाया जा रहा है। बलराम जयंती हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को बलराम जयंती मनायी जाती है। यह व्रत माता अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए करती हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में हलषष्ठी को कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसे लह्ही छठ, हर छठ, हल छठ, पीन्नी छठ या खमर छठ भी कहा जाता है।

बलराम जयंती 2021

हलषष्ठी व्रत
28 अगस्त 2021, दिन शनिवार 

षष्ठी तिथि प्रारंभ
27 अगस्त 2021 को शाम 06:50 बजे

षष्ठी तिथि समाप्त
28 अगस्त 2021 को रात्रि 08:55 बजे

मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण जी के भाई बलराम जी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में हलषष्ठी व्रत मनाने की परंपरा है। यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। क्योंकि बलराम जी का प्रधान शस्त्र हल और मूसल है। इसलिए उन्हें हलधर भी कहा जाता है। और उन्हीं के नाम पर इस पावन पर्व का नाम हल षष्ठी पड़ा है।

हल षष्ठी के दिन माताओं को महुआ की दातुन और महुआ खाने का विधान है। इस व्रत में हल से जोते हुए बागों या खेतों के फल और अन्न खाना वर्जित माना गया है। इस दिन दूध, घी, सूखे मेवे, लाल चावल(तिन्नी का चावल),करमुए(नदी ,तालाब में पाए जाने वाला एक प्रकार का साग) आदि का सेवन किया जाता है।

इस व्रत को नवविवाहित स्त्रियां भी संतान की प्राप्ति के लिए करती हैं। और माता संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत को करती हैं।

इस व्रत की पूजा करने से पहले प्रात:काल स्नान आदि से निवृत्त हो जाना चाहिए। और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। और गाय के गोबर से जमीन को लीपकर छठी मैया का स्वरूप पूजा स्थल पर बना लें। इसके बाद वहीं भूमि में महुआ, कुश और पलाश की एक-एक शाखा बांधकर गाड़ दें और उसके बाद इनकी पूजा करें।

विशेष नोट - इस व्रत में कोई भी एसी चीज़ नहीं खाई जा सकती जिसकी पारंपरिक रूप से खेती की जाती है। 

जय छठी मैया।। 
श्री चरणों का दास- सुनील कुमार मिश्रा 

छवि -माता जी द्वारा छठी माता स्थापना और पूजन।

साभार :- सुनील कुमार मिश्रा की पोस्ट से
(रामायण सन्देश)

🙏पोस्ट कॉपी करने के लिए क्षमा प्रार्थि🙏

Wednesday, 21 July 2021

जिसने प्रेम को खोया है...

                        जिसने प्रेम को खोया है...

उनसे क्या पूछना
जिसने जिस्मों को पाया है,
प्रेम का अर्थ उनसे पूछो 
जिसने प्रेम को खोया है।

लोकबाग में हंसकर 
चाँदनी रातों में रोया है,
दिन रैन जागकर
नम आँखों में सोया है।

एक पल मिलने को
अपना सारा दिन गंवाया है,
एक झलक दिखने को
अपना सारा खून जलाया है।

अपमानित होकर भी
जिसने प्रेम निभाया है,
प्रेमिका की खुशी के लिए
जिसने प्रेम बलि चढ़ाया है।

उनसे क्या पूछना
जिसने जिस्मों को पाया है,
प्रेम का अर्थ उनसे पूछो 
जिसने प्रेम को खोया है।
जिसने प्रेम को खोया है।।
















क्या वो प्यार भुला पाओगे...

                      क्या वो प्यार भुला पाओगे...

जिसकी खातिर
गलियों का 
चक्कर लगाया 
उसी ने
ठुकराया 
छोड़ हाथ 
मोहोब्बत का
उसने
पैसों को अपनाया 
जाओ 
खुश रहना 
इस दौलत में
मगर जान लो
तरस जाओगे
किसी की 
सच्ची मोहोब्बत में
सब कुछ 
तो पा जाओगे
लेकिन वो
प्यार कहाँ
से लाओगे
जब प्यास जगेगी
मोहोब्बत की 
तब भी 
क्या तुम 
पैसे ही खाओगे
सच कहना 
हमको तो 
भूल जाओगे
पर क्या वो
प्यार भुला पाओगे।

Sunday, 11 July 2021

एक दौर जवानी है...


                            एक दौर जवानी है...


कुछ बिखर गए 
कुछ निखर गए,
कुछ ने इसकी ही जिद ठानी है
इसकी सबपे मनमानी है।
एक दौर जवानी है।।

किसी में जोश जगाए
किसी के होश उड़ाए,
किसी की ये ख्वाहिश पुरानी है
इसकी सबपे मनमानी है।
एक दौर जवानी है।।

कुछ के खेलकूद छूटे
कुछ के हिस्से जिम्मेदारियां फूटे,
कुछ के बचपने की विदा निशानी है
इसकी सबपे मनमानी है।
एक दौर जवानी है।।

कहीं दिल धड़काए
कहीं दिमाग आजमाए,
कहीं तो बस इसकी ही रवानी है
इसकी सबपे मनमानी है।
एक दौर जवानी है।।

कभी प्रौढ़ता का कदम
कभी हार जीत का परचम,
कभी जिंदगी की खूबसूरत कहानी है
इसकी सबपे मनमानी है।
एक दौर जवानी है।।

कभी छूटता आँगन
कभी पकड़ता कफ़न,
कभी आंखों का बहता पानी है
इसकी सबपे मनमानी है।
एक दौर जवानी है।।

कुछ जूझ गए
कुछ बुझ गए,
कुछ तो इससे रूठ गए
पर इसने कहाँ सबको मनानी है।
इसकी सबपे मनमानी है
एक दौर जवानी है,
सबको आनी है
आकर चली जानी है।
एक दौर जवानी है।।

                                          :- संदीप प्रजापति

( ऊर्जा, उल्हास और उत्तेजना से भरी जवानी का
हम के जीवन में प्रवेश होता है, जो जिंदगी को और खूबसूरत बना देती है। जवानी जिंदगी को एक नए आयाम पर पहुंचाने का मौका और साहस प्रदान करती है। जो व्यक्ति इसका सही इस्तेमाल कर ले जाता है, वो जीवन में सफल हो जाता है और जो इसका इस्तेमाल केवल कामना पूर्ति के लिए करता है, वो स्वयं अपना नाश करने का रास्ता खोज लेता है।)

Friday, 25 June 2021

ये बारिश...


                               ये बारिश...

किसी को हंसाती है
किसी को रुलाती है,
किसी को अपनों की याद दिलाती है
ये बारिश जाने क्या क्या खाब दिखाती है।

किसी के आँशुओं को धोती है
किसी के साथ साथ रोती है,
किसी को सपनों से मिलाती है
ये बारिश जाने क्या क्या खाब दिखाती है।

किसी को प्यार में भीगाती है
किसी को गमों में डुबाती है,
किसी को बूँदों से रिझाती है
ये बारिश जाने क्या क्या खाब दिखाती है।

किसी का दिल दरिया कर आती है
किसी का समंदर भी सूना कर जाती है,
किसी को चंचल नदियों सा बहाती है
ये बारिश जाने क्या क्या खाब दिखाती है।

किसी को धानी चुनरिया ओढ़ाती है
किसी को जीते जी कफन चढ़ाती है,
किसी का पतझड़ भी सावन कराती है
ये बारिश जाने क्या क्या खाब दिखाती है।
ये बारिश जाने क्या क्या खाब दिखाती है।।

ये बारिश ही तो है
जो सब कुछ याद कराती है, जो हमको रुलाती है।
ये बारिश ही तो है
जो फिर से एक आश जगाती है, जो तुमसे मिलाती है।



(आशा है आप सब के जीवन में सदा प्रेम की बारिश होती रहे। ठाकुर जी सबको प्रेम प्रदान करें। जैसे धरती से उठी पानी की बूंद ,बारिश के रूप में फिर से आ धरती में मिलती है। वैसे ही ईश्वर का दिया जीवन ईश्वर में प्रेमपूर्वक मिलें।)
             🙏राधे राधे🙏




Sunday, 20 June 2021

Father's Day

 

FATHER'S DAY

            जैसा कि हम जानते हैं आज Father's Day है, एक ऐसा दिन जो जग के सारे पिताओं को समर्पित है। वैसे तो माता-पिता के लिए कोई एक दिन होना काफी नहीं इनके तो होने से ही सारे दिन है। फिर भी जैसे ईश्वर सर्वस्व होते हुए भी एक विशिष्ट दिन पर अत्यधिक पूजे जाते हैं। वैसे ही आज के युग में माता- पिताओं का सम्मान करने के लिए एक विशिष्ट दिन का होना भी आवश्यक है, ताकि इन्हें भरपुर सम्मान और स्नेह मिल सके।
         पिता वो शख्स है जिसने हमें अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया, जिसने हमें चलना, दौड़ना गिरना और गिर कर फिर उड़ना सिखाया। पर हार मानना कभी न सिखाया। पिता घर की वो छत है जिसके सायें में सब महफूज है। पिता का होना जैसे आँगन में नीम का होना ऊपर से कड़वाहट लेकिन बहुत फायदेमंद। पिता नारियल के उस फल के समान है जो बाहर से तो बहोत कठोर दिखता है, लेकिन भीतर से बिल्कुल मुलायम होता है। पिता के लिए ऐसी कई उपमाएँ भी कम पड़ जाए। पिता की हर किसी के जीवन में बहुत ही अहम भूमिका होती है। पिता जीवन का आधार है, पिता जीवन का सार है।
        पिता का न होना जैसे छत के बिन घर का होना, जिसे न जाने कब कोई लूट ले। पिता का न होना परिवार को सामाजिक और आर्थिक रूप से झंकझोर देता है।

एक शेर है वो
मैं उसके कदमों की आहट हूँ,
क्या लिखूँ मैं उसके लिए
मैं खुद ही जिसकी लिखावट हूँ।

बाप को गले लगाने के लिए
बेटे को उस लायक बनना पड़ता है,
इसी  एक तमन्ना के लिए
हर रोज खुद से लड़ना पड़ता है।

:- SANDEEP PRAJAPATI


(पिता के विषय में उत्पन्न सारी भावनाओं को लेख में उतार देना आसान नहीं फिर भी कुछ कोशिश की है।आप भी अपने विचारों को, पिता के लिए अपनी भावनाओं को हमारे साथ अवश्य सांझा करे। आपकी प्रतिक्रिया इन्तजार रहेगा।)


बेबाक मोहोब्बत

                         बेबाक मोहोब्बत

वक्त दर वक्त बीतता गया और
मोहोब्बत कुछ यूं गहरी हुई है,
तोड़कर सारे बन्धनों को
रूह ये मेरी तेरे लिए ही बावरी हुई है।

काटे तुझ बिन जो  पल
अब फिर हो न वो दुबारा,
बिछड़े जो अब की तो
छीन लाऊं रब से तुझको ओ यारा।

जमाने के रोके न रुकूँ
तोड़कर बन्धन मज़हबों के,
इस दुनिया में न सही
तो आ मिलूं जहाँ में ख्वाबों के।

मुझमें मेरे राम बसे
तुझमें तेरे ख़्वाजा,
मोहोब्बत से सजी रहे हमारी ये दुनिया
कभी न बंद हो चाहतो का ये दरवाजा।

जिंदगी के हर मोड़ पर साथ तुम्हारा हो।
हाथों में मेरे बस हाथ तुम्हारा हो।।

                                                                                 :- Sandeep Prajapati


To join me on



 





 

Saturday, 19 June 2021

माथेरान हिल स्टेशन

   

    क्या कहा...आपको भी पहाड़ों, वादियों,घाटियों और प्रकृति से प्रेम है। तब तो आप बिल्कुल सही लेख पढ़ रहे हैं। आइए मैं आपको ले चलता हूँ ऐसी ही एक पहाड़ी पर जहाँ से लौट के आने को आपका जी बिल्कुल भी नहीं करेगा। अरे हाँ हाँ भाई है ऐसी भी एक जगह है। आज मैं आपको ले चल रहा हूँ महाराष्ट्र के माथेरान हिल स्टेशन , आइए चलते हैं।


         "माथेरान" जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट होता है, 'पर्वतों के माथे पर बसा अरण्य'।  एक ऐसा प्राकृतिक क्षेत्र जिसके अनुभव से आपका चित्त एकदम शांत और प्रसन्न हो जाए। माथेरान महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले में स्तिथ है और यहाँ का सबसे निकटतम रेल्वे स्टेशन नेरल है। मुम्बई और पुणे से सटे होने के कारण इन महानगरों में बसे शहरी लोगों के लिए सप्ताहांत छुट्टियां मनाने के लिए माथेरान एक लोकप्रिय स्थल है। शहरों की भागदौड़ भरी जिन्दगी से दूर सुकून के कुछ पल बिताने के लिए माथेरान बिल्कुल उपयुक्त विकल्प है।


         नेरल तक आप ट्रेनों या अपने निजी वाहनों से आ सकते हैं। मगर हाँ इसके आगे का सफर आप किसी भी प्रकार के वाहन से नहीं कर सकते हैं। ऐसा इसलिए ताकि वाहनों के प्रदूषण से यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और वातावरण खराब न हो। नेरल से आगे हिल स्टेशन की ओर जाने के लिए आप पैदल, घोड़ागाड़ी, रिक्शा या यहाँ की सुप्रसिद्ध टॉय ट्रेन का इस्तेमाल कर सकते हैं। टॉय ट्रेन जो कि अपनी खूबसूरती और यादगार यात्रा के लिए जानी जाती है। धीमी गति से आगे बढ़ती यह ट्रेन आपको पूरे हिल स्टेशन पर चढ़ती उतरती नजर आ जाएगी। जिसमें बैठकर आप आराम से खूबसूरत प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठा सकते हैं। माथेरान में प्रवेश करते ही यहाँ का वातावरण और शुद्ध हवा मन को ताजगी और स्फूर्ति से भर देता है।
           वैसे तो इस हरे-भरे हिल स्टेशन पर साल भर पर्यटकों का तांता लगा रहता है। लेकिन यहाँ इसकी बाँह में  आने का सबसे अच्छा मौसम हैं मानसून यानि की बरसात। बरसात के दिनों यहाँ चारों तरफ हरियाली, घाटियों में फैला कोहरा, हवा में तैरते बादल और भीगा-भीगा सा मौसम एक अलग ही समाँ पैदा करते हैं। बरसात के दिनों में यह स्थान और भी सुहावना हो जाता है।
          एक बार माथेरान हिल स्टेशन में प्रवेश कर लेने के बाद आप खुद को ही प्रकृति  के सबसे करीब पाएंगे। जहाँ तक नजर जाए वहाँ तक बस दूर तक फैले ऊंचे-ऊंचे पहाड़ और चारो तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आती है। पहाड़ों के पास बने गणपति जी की प्रतिमा भी काफी लोकप्रिय और देखने योग्य है।  यहाँ की खूबसूरती का आनंद लेने के लिए यहाँ पर कई सारे दृश्य स्थल हैं। जहाँ से आप पूरी की पूरी घाटी को एक अलग ही रोमांच के साथ देख सकते हैं और वादियों में फैली सुंदरता को आंखों में बसा सकते हैं। इनमें से कुछ दृश्य स्थल काफी दुर्लभ है जहां का नजारा आपको कहीं और नहीं मिलेगा।
        मैं आपको ऐसे ही कुछ दृश्य स्थलों के बारे में बताता हूँ। जैसे कि माउंट बेरी स्थल यहाँ से आप नेरल से आती हुई ट्रैन का दृश्य देख सकते हैं। पहाड़ों पर हरियाली के बीच से घूम-घूम कर आती ट्रैन का दृश्य वाकई अभिभूत कर देता है। ऐसे ही एक है हनीमून पॉइंट यहाँ से घाटी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है, जो कि अविस्मरणीय है।
             पेनोरोमा पॉइंट  यहाँ से उगते सूरज को देखते ही बनता है। पेनोरोमा पॉइंट से सूर्योदय के दृश्य देखना बेहद ही सुंदर और काल्पनिक है। वैसे ही यहाँ से सूर्यास्त का नजारा भी बहुत नाटकीय और मनोरम होता है।
                वन ट्री हिल पॉइंट, हार्ट पॉइंट, मंकी पॉइंट, पोर्क्युपाईन पॉइंट, रामबाघ पॉइंट, खंडाला पॉइंट, लुईसा पॉइंट  इत्यादि पॉइंट्स ये सारी जगह यहाँ की खूबसूरती को निहारने केे सबसे के अच्छे स्रोत हैं।
                  और हां एको पॉइंट  तो और भी आकर्षक है यहाँ से आप अपनी ही ध्वनि की प्रतिध्वनि वादियों से टकराकर लौटते हुए सुन सकते हैं। लव पॉइंट , हार्ट पॉइंट, हनीमून पॉइंट और एको पॉइंट प्रेमी जोड़ों में काफी लोकप्रिय दृश्य स्थल है। मंकी पॉइंट पर तो आप बन्दरों की भरमार देख सकते हैं। बन्दरों के अलावा यहाँ पर  खच्चर, घोड़े, हाथी इत्यादि प्राणी भी पाए जाते हैं। यहाँ आप घुड़सवारी का भी आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा एलेक्सजेंडर पॉइंट, लिटिल चौक पॉइंट, ओलंपिया रेसकोर्स, लॉर्ड्स पॉइंट इत्यादि स्थानों पर जाकर प्रकृति की खूबसूरती का एहसास कर सकते हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
                 और तो और यहाँ की सबसे खूबसूरत जगह शारलेट लेक  अपने अगल-बगल हरियाली लिए हुए, पानी से लबालब भरी हुई यहाँ की खूबसूरती को और निखार देती है। इस झील का नजारा और इसके पास बैठने का सुकून काफी आनंददायक है।
           इतनी खूबसूरत जगह से किसी का भी वापस जाने को मन नहीं करता। इसीलिए यहाँ पर ठहरने की भी व्यवस्था है, जो कि किफायती दरों पर उपलब्ध होती है। दिन भर का थका व्यक्ति इन होटलों में रात्रि विश्राम कर सकता है और पुनः सुबह प्रकृति की गोद में जग कर प्रकृति को जी सकता है। वैसे भी एक दिन में इस जगह को जी पाना संभव नहीं है इसीलिए यहाँ रुकने की सुव्यवस्था है।
            और फिर अंत में न चाहते हुए भी जब लौटने का वक्त हो जाए। फिर से वही रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी बुलाए तो लौटना पड़ता है। मानस में अनेकों स्मृतियाँ लिए अलविदा कहना पड़ता है।

बैठे हो किस सोच में, आइए माथेरान।
कुछ पल जी लो, प्रकृति की गोद मे।।

स्रोत:- स्वानुभव एवं इंटरनेट

(इस लेख में व्यक्तिगत विचार और अनुभव साझा किये गए हैं। किसी को भी कोई सुझाव देना हो, कोई त्रुटि बतानी हो या कोई और सहायता करनी हो तो आपका स्वागत है।)

Friday, 18 June 2021

आकर मेरी पीठ थपथपाना...

आकर मेरी पीठ थपथपाना...


साथ मेरे उड़ान न भर  सको,

मत भरना।

मैं अकेले उड़ान भर लूँगा,

मुझे आसमाँ छूना है।

मैं बिन पंख ही उड लूँगा...

हाथ मेरा थाम न चल सको,

मत चलना।

मैं अकेले ही चल लूँगा,

ईश्वर का दीया हूँ।

मैं बिन तेल ही जल लूँगा...

मंजिल मेरी न बन सको,

मत बनना।

मैं खुद ही मंजिल बन लूँगा,

अंधेरों का मुसाफिर हूँ।

मैं बिन पांव ही दौड़ लूँगा... 

रास्ते के कांटे मेरे न बीन सको,

मत बीनना।

मैं खुद ही चून लूँगा,

सपनों का सौदागर हूँ।

मैं बिन आंख ही ख्वाब बून लूँगा...

मुफ़लशी में मेरे न आ सको,

मत आना।

मैं खुद ही पार पा लूँगा,

वीरों का वंशज हूँ।

मैं  बिन अनाज घास की रोटी खा लूँगा...


दुख के दिनों में न सही

दुख मैं अकेला ही काट लूँगा,

मगर सुख में तो आ सही

सुख मैं सबमें बाँट लूँगा।

मत आना मेरे संघर्षों में

जो गिरू मैं तो मत उठाना,

मगर आ जाना मेरे उत्कर्षों में

आकर मेरी पीठ थपथपाना।

आकर मेरी पीठ थपथपाना।।


                                               :- संदीप प्रजापति





एक संगिनी

एक संगिनी तुम्हारा मिलना  जीवन को एक नई आस देता है, घोर अंधेरे में विहंगम उजला कोई प्रकाश देता है। तुम तब आई जब युद्ध मैं हार चुका था, निराश...